इरफ़ान खान राजस्थान एक एक छोटे से कसबे में जन्मा एक लड़का जिसने अपने हुनर से पूरे विश्व में पने नाम का डंका बजवा दिए और जो आज जाते जाते भी पूरे हिन्दुस्तान को रुला गया । इरफ़ान खान ने अपना हुनर क्रिकेट में भी आजमाना चाहा परन्तु पैसे की कमी क कारन वो आगे नहीं बढ़ सके । फिर उन्होंने १९८४ में दिल्ली से राष्ट्रीय नाट्य से अपनी नाट्य शिक्षण की पढ़ाई पूरी की।
इरफ़ान खान ने फ़िल्मी जगत में अपना करियर १९८८ में सलाम बॉम्बे नाम की फिल्म से की और इसमें उनका किरदार काफी लोग को पसंद आया उनकी अंतिम फिल्म अंग्रेजी मध्यम में भी उनका किरदार कबील-ऐ-तारीफ है।
इरफ़ान खान ने कभी कोई किरादर को छोटा नहीं समझा , वो एक सुलझे हुए कलाकार थे । हिन्दी अंग्रेजी फ़िल्मों, व टेलीविजन के एक कुशलअभिनेता रहे हैं। उन्होने द वारियर, मकबूल, हासिल, द नेमसेक, रोग जैसी फिल्मों मे अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हासिल फिल्म के लिये उन्हे वर्ष २००४ का फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। वे बालीवुड की ३० से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। इरफान हॉलीवुड मे भी एक जाना पहचाना नाम हैं। वह ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलियनेयर, लाइफ ऑफ़ पाई और द अमेजिंग स्पाइडर मैन फिल्मों मे भी काम कर चुके हैं। 2011 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया। 60वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2012 में इरफ़ान खान को फिल्म पान सिंह तोमर में अभिनय के लिए श्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया जा चूका है ।
कुछ वर्ष पहले जब एक इवेंट में उनसे मुलाकात हुई थी तो उनकी सादगी देख कर मे खुद दंग हो गया था , इतना बड़ा एक्टर और रेष मात्र का घमंड नहीं । इरफ़ान खान हमेशा से हसमुख व्यक्ति रहें हैं ।
पिछले कुछ वर्षों से वे न्यूरो इंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहे थे और आज २९ अप्रैल २०२० को मुंबई में इरफ़ान खान ने अपनी आखिरी सांस ली और पूरे हिंदुस्तान को शोक में डूबा पंचतत्व में विलीन हो गए । इतनी विलक्षण प्रतिभा इ संपन्न व्यक्ति एक युग में एक ही बार जन्म लेता है ।
भगवन आपकी आत्मा को शांति दे ।
ॐ शांति
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