Saturday, 10 June 2017

किसान : अन्नदाता

      

                  पिछले दिनों महाराष्ट्र में किसानो पर जो कार्यवाही हुई उससे मैं काफी आहत हुआ हूँ और अपनी सोच को अंकित करने पर मजबूर हुआ हूँ | मध्य प्रदेश में पुलिस प्रशाशन द्वारा किसानो पर इसलिए गोली चलने की कार्यवाही करनी पड़ी क्यूंकि किसान उग्र हो गये थे चलिए आज इसी मसले पर थोड़ी रौशनी डाली जाये | 
                     जब मैं स्कूल जाता था तब मेरे भूगोल के शिक्षक ने एक पाठ में सिखाया की हमारा भारत देश एक कृषि प्रधान देश है और हमारे देश की अधिकतर आय (जीडीपी) कृषि पर ही निर्भर करती है |परान्त यदि आकड़ों पर नजर डाली जय तो देख कर काफी शर्मिंदगी महसूस होगी की बड़ी तेजी से  किसान कर्ज के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठा रहर हैं | NATIONAL SAMPLE SURVEY ORGANIZATION (NSSO) संस्था द्वारा २०१३ में किये गए सर्वे के अनुसार किसान की औसतन मासिक आय ६४२६ रुपये थी और उसी वर्ष की औसतन व्यय राशि थी ६२२३ रुपये | मतलब कुल मिला के वर्ष २०१३ में उनकी औसत मासिक बचत मात्र २०३ रूपये रही |

आखिर देख मरते किसान को
 नींद कैसे आती होगी देश के प्रधान को

                       अब आते है असल मुद्दे पर महंगाई दर २०१३ के हिसाब से २०१७ में बहुत ज्यादा बढ़ गयी है और  वर्ष २०१३ में भी मात्रा ६४२६ रुपये में अपने परिवार का पालन पोषण ठीक से नहीं हो सकता था | अपनी निजी जिंदगी को सुचारू रूप से चलाने के लिए तथा अपने बच्चो की पढ़ाई को पूर्ण करने के लिए फिर ये लाचार किसान कर्जदारों के पास जाकर अपनी जमीन या सम्पति का कोई हिस्सा गिरवी रख कर्ज लेता है और फिर उसे उचित निर्धारित समय पर न वापस कर पाने से व्याज बढ़ता जाता है और फीर उस किसान के पास आत्म हत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता |सरकार द्वारा किये गए सभी वादे महज एक पन्ने पर अंकित बेकार शब्द बन कर रह गए हैं|  सरकार बनाने के लिए किसानो और गरीबो के लिए जुमलों की बौछार की जाती है | और बाद में वही सरकार बनते ही सारे वादे गायब हो जाते हैं | 
                    महाराष्ट्र  में प्रदर्शन कर रहे किसान भाइयों पर पुलिस प्रशाशन द्वारा बर्बरता से गोली चली गयी और ये कहा गया की प्रदर्शन कर रहे किसान उग्र हो गए थे उन्हें शांत कराने के लिए गोली चलनी पड़ीं | इस जवाब से मेरे मन में कुछ और सवाल खड़े हो गए हैं 

१) किसानो के उग्र होने का कारन कौन है ?
२) क्या इस स्तिथि को किसी और तरीके से नहीं संभाला जा सकता था ?
३) क्या किसानो के लिए कोई ऐसा फैसला नहीं लिया जा सकता की उन्हें प्रदर्शन करने की जरुरत ही न पड़ती ?
आखिरी सवाल 
४) अगर महाराष्ट्र  के किसानो पर उग्र होने की वजह से गोली चलनी पड़ी तो क्या कश्मीर में हो रहे उग्रवादिता को ध्यान में रख कर वहा की सरकार  द्वारा भो गोली का आदेश नहीं दे देना चाहिए ?
जो भगवान का सौदा करता है,
वो इंसान की क़ीमत क्या जाने? 
जो ‘धान’ की क़ीमत दे न सका, 
वो ‘जान’ की कीमत क्या जाने?
                                          @DrKumarVishwas

                         मैं बस  यही कहूंगा की इसपर सभी राजनितिक दाल को एकजुट होकर इस समस्या का समाधान निकलना चाहिए वरना जिस देश की अर्थव्यवस्था में सबसे अहम् योगदान जिसका है यदि उसे ही  जंतर मंतर पर मूत्र पी कर धरना देन पड़े या धरना देते समय गोली का शिकार होना पड़े  तो उस देश के लिए  इससे ज्यादा शर्म की बात नहीं होगी | किसान हमारे अन्नदाता हैं इन्ही की वजह से २ वक्त की रोटी मिलती है हमे इनकी इज्जत करनी चाहिए और इनकी तकलीफों का जल्द से जल्द निवारण करना चाहिए नहीं तो स्थिति आगे और बिगड़ते ही जाएगी.................

                  जय हिन्द  
जय जवान जय किसान
ASHISH DWIVEDI की कलम से 




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